वोह हो कर भी नहीं थे
और नहीं होकर भी नहीं हैं
आवाज़ क्यूँ हर दम मेरी तरफ से ही आये
हम इस इंतज़ार में हैं की कभी
वोह भी हमें पुकार ले
यूँ तो ज़िन्दगी में
कोई गम कोई तकल्लुफ नहीं
लेकिन ऐसे भी तो
कोई कल की आरजू या उमंग नहीं
अल्फाजों में एक सन्नाटा सा है
खामोशी भी बातें नहीं करती
इस रिश्ते की एहमियत यही है
की हमको अभी इसकी समझ ही नहीं
जो इस वक़्त लम्हा गुज़र रहा है
वोह एक रेट के टीले को
अपने संग लिए जा रहा है
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और नहीं होकर भी नहीं हैं
आवाज़ क्यूँ हर दम मेरी तरफ से ही आये
हम इस इंतज़ार में हैं की कभी
वोह भी हमें पुकार ले
यूँ तो ज़िन्दगी में
कोई गम कोई तकल्लुफ नहीं
लेकिन ऐसे भी तो
कोई कल की आरजू या उमंग नहीं
अल्फाजों में एक सन्नाटा सा है
खामोशी भी बातें नहीं करती
इस रिश्ते की एहमियत यही है
की हमको अभी इसकी समझ ही नहीं
जो इस वक़्त लम्हा गुज़र रहा है
वोह एक रेट के टीले को
अपने संग लिए जा रहा है
